अध्याय 39

"अब क्या तमाशा खड़ा कर रही हो?" जेम्स और अमेलिया दोनों मुड़कर मेरी तरफ देखने लगे। जेम्स की आवाज़ में साफ़ चिड़चिड़ाहट थी।

मेरे पास बहस करने की ताकत नहीं थी। मैंने कहा, "बस यही मान लो कि मैं बेवजह ही अड़ रही हूँ।"

मेरे भीतर कुछ था जो पहले ही दरक चुका था—अब आखिरकार टूट ही गया।

शायद यही फर्क था—प्या...

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